पहली बार बच्चों को पढ़ना  कैसे सिखाएं?

जब बच्चा पहली बार सीखने चलता है तो उसके अंदर अनेक तरह के उत्साह होते हैं उसे नया चीजों को सीखने का उसके अंदर लगन या चाह होती है ।इसका फायदा माता-पिता को कोई भी नई चीज सीखते समय उठाना चाहिए ।अपने बच्चों के अंदर सीखने की भावना  को देखते रहना चाहिए ,कि किस परिस्थिति में वह सीख रहा है ?किस तरह सीखने पर सीख रहा है ?किस समय सीखने पर सीख रहा है? और किसी व्यक्ति से सीख रहा है? इन सभी बातों पर ध्यान देने के बाद ही बच्चे को पढ़ना सीखना शुरू करना चाहिए। यदि कोई भी चीज उसे पढ़ना सीख रहे हैं ,तो पहले यह देखना चाहिए की पढ़ने में रुचि किस विषय पर ज्यादा है। उसे उस विषय को पहले सीखना चाहिए । जैसे यदि बच्चा एबीसीडी जल्दी पढ़ता है तो उसे एबीसीडी सीखना चाहिए यदि बच्चा के ख ग घ जल्दी पढ़ता है तो उसे पहले क ख ग घ और यदि वह बच्चा 1 2 3 4 पहले पढ़ना शुरू करता है सीख रहा है तो उसे 1234 पहले सीखाना चाहिए । इन सभी चीजों को ध्यान रखने के बाद जब उसे पढ़ाना शुरू किया जाता है तो बच्चा अपने आप उन चीजों को जल्दी पकड़ता है और सीखता जाता है जैसे यदि उसे बोला जाएगा तो बोल देता है। अब प्रश्न यह होता है की कैसे सिखाया जाए।?

1: बच्चों को जो भी चीज सीखनी है उसे लगातार बोलते रहना चाहिए।उसे ध्यान से सुनते रहते हैं और अपने समय पर वह उसे बोलने का प्रयास करते हैं। आपके कहने पर वह तुरंत कोई भी जवाब नहीं देते हैं। इसलिए उनके सामने उन चीजों को लगातार बोलते रहना चाहिए ।चाहे उनके साथ खेल रहे हो ।चाहे उन्हें खाना खिला रहे हैं ।चाहे उनके साथ कोई भी कार्य कर रहे हो। तो आप उनको सिखाने वाली चीज लगातार बोलते रहेंगे तो बच्चे धीरे-धीरे करके उसे सीख जाते हैं।

2: बच्चों को अपनी सिखाए हुए शब्दों को या वर्णों को बोलने के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए। जब तक उसे शब्द को बोल नहीं देते हैं। तब तक उन्हें बोलने के लिए कहते रहना चाहिए। बच्चे सुनते-सुनते उसे बोलने का प्रयास अवश्य करते हैं ,किंतु जब तक उन्हें प्रेरित नहीं किया जाएगा, तब तक वह स्वयं से बोलने का प्रयास बहुत देर में करते हैं। यदि उन्हें प्रेरित करते रहा जाएगा तो वह उसे शब्द को या उसे विषय को जल्दी सीखने का प्रयास करते हैं ,या सीख जाते हैं।

3:  शुरुआत में सीखते समय कभी भी बच्चे को डांटना नहीं चाहिए। गुस्से में या डरा कर कभी भी कोई भी नहीं सीखना चाहिए ।डरा कर या गुस्से में सीखाने पर बच्चे नहीं सीखते हैं, और बाद में न सीखने का जिद करके बैठ जाते हैं ।इसलिए शुरुआत में उन्हें किसी भी तरह तरीके से डरना नहीं चाहिए।

4:  बच्चों की क्षमता को जानकर ही उन्हें उन्हें कुछ भी सीखने का प्रयास किया जाना चाहिए। क्योंकि हर बच्चे में सीखने की क्षमता अलग-अलग होती है। उनके क्षमता के अनुसार ही उन्हें कुछ भी सिखाया जा सकता है ।जैसे यदि बच्चा ज्यादा बोलता है ,ज्यादा समझता है, तो उसे समझ के अनुसार ही कोई चीज सीखना चाहिए। यदि बच्चा कम बोलता  कम समझता है, तो उसे छोटी चीज, कम चीज और बहुत दिनों तक सिखाने की जरूरत  पड़ती है। माता-पिता को बच्चों को कुछ भी सीखने के लिए यह जरूर ध्यान रखना चाहिए ,कि बच्चा कैसा है ?उसकी सीखने की क्षमता कितनी है? और उसी के अनुसार उसे सिखाया जाना चाहिए ।

                      सामान्यत 5 वर्ष की उम्र के पश्चात ही बच्चों को पढ़ना सीखना चाहिए ।उसके पहले बच्चे को स्वच्छंद रूप से छोड़ देना चाहिए ।वह प्रकृति से ,मां-बाप से ,परिवार के सदस्यों द्वारा ,समाज से जो भी सीखना है ,उसे सीखने के लिए छोड़ देना चाहिए ।5 वर्ष की उम्र की पश्चात उसे पढना सिखाया जाना चाहिए। और इस उम्र से उसे पढ़ने के लिए विद्यालय भी भेजा जाना चाहिए।

                                                                                                            धन्यवाद।